त्रन ताम (रूमा) के असली और नकली नामों की सूची: टॉम वैन ट्रान (जन्म का नाम) जॉन सेंट (वर्तमान कानूनी नाम, जो उनके अमेरिकी पासपोर्ट पर दर्ज है) गुरुजी सगरुमागरमाथा (वह नाम जो वे वर्तमान में पसंद करता है) ट्रान टाम ट्रान वान टाम ट्रान वान उट हुयनह लॉन्ग ट्रान उट हुयनह लॉन्ग ट्रान टाम ट्रान टाम/ टॉम ट्रान मास्टर ट्रान ट्रान ट्रान यान टॉम ट्रान येन टॉम काऊ उत रुमा मास्टर रुमा रुमा जॉन सेंट मास्टर रुमा जॉन सेंट मिन्ह सु रुमा मिनह सु ट्रान टाम गुरुजी रुमा ओम रुमा सगरुमागरमाथा आदि… अतिरिक्त चेतावनी: बूई टन किएट एक और नकली गुरु और ट्रान टाम का अनुयायी है। हमारा मानना है कि ट्रान टाम ने बूई टन कियत को औलेक (वियतनाम) में अपना खुद का आध्यात्मिक समूह स्थापित करने का निर्देश दिया है ताकि वहां के होआ हाओ अनुयायियों को ट्रान टाम का अनुसरण करने के लिए मनाया जा सके। बूई टन कियत उन्हें बताते हैं कि ट्रान टाम, होआ हाओ के संस्थापक, पूजनीय प्रबुद्ध गुरु हुआंग फू सो (वीगन) का पुनर्जन्म हैं, जो एक झूठ है। बूई टन कीट जनता को यह भी बताते हैं कि ट्रान टाम 'जेड एम्परर' (पन्ना सम्राट) हैं, जो एक और असत्य तथ्य है, ताकि राष्ट्र के आध्यात्मिक समुदायों के बीच ट्रान टाम की अपील को और बढ़ाया जा सके। अंत में, ब्यूई टन कीट झूठी तौर पर खुद को 'वियतनाम का ‘मैत्रेय' घोषित कर देते हैं।
ओह, मैं भूल गई; अभी-अभी मैं रिकॉर्डिंग बंद करना भूल गई थी। मैं लगभग समाधि में चली गई थी। अब मुझे इसे रोकना होगा, क्योंकि अभी सुप्रीम मास्टर टीवी का बहुत-सा काम करना बाकी है। और मुझे लगता है कि परमेश्वर तथा कुछ बुद्ध राजाओं के साथ हुई वह वार्ता भी रिकॉर्ड करनी होगी, जिसका मैंने अभी आपसे उल्लेख किया था। उसे प्रसारित करना है या नहीं, यह अलग बात है। लेकिन यदि मैं इसे आप आंतरिक सदस्यों को भेजने पर भी विचार करूँ, तो मुझे इसे रिकॉर्ड करना ही होगा। हम देखेंगे। इस समय मैं थोड़ी थकी हुई हूँ। हाल में काम बहुत अधिक रहा है और कई अप्रिय घटनाएँ हुई हैं। और मेरे बेचारे, अत्यंत मासूम कुत्ता-जन ने बहुत पीड़ा सही है। हम उसकी सहायता के लिए भी अपना पूरा प्रयास कर रहे हैं। इसके बारे में जानने वाले दल के कुछ सदस्य भी उसके लिए प्रार्थना करते हैं। और इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करती हूँ। वैसे, मैं आप सभी दल के सदस्यों को धन्यवाद देती हूँ, जो भी मेरे कुत्ता-जन के लिए सच्चाई, पवित्रता और प्रेम से प्रार्थना करते हैं। आपने जितना दिया है, परमेश्वर आपको उससे कई गुना अधिक आशीर्वाद दें। और वैसे, मेरा कुत्ता-जन अब बेहतर है। उन्होंने मुझे एक बहुत विशिष्ट और अच्छे चिकित्सालय की जानकारी भेजी। और स्वयं परमेश्वर ने मुझे बताया कि कौन-सा चुनना है, हालाँकि मुझे संदेह था, क्योंकि मुझे लगा था कि दूसरा चिकित्सालय संसार के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सालयों में से एक है। मैं अपने कुत्ता-जन के लिए उसी को चुनना चाहती थी। लेकिन परमेश्वर ने कहा, “नहीं, यह वाला, यह बेहतर है।” इसलिए मुझे परमेश्वर की आज्ञा माननी पड़ी। और यह कारगर है! यह अब तक के उन सभी उपचारों से अधिक कारगर है, जिनके लिए मेरे लोग उसे इतने चिकित्सकों के पास ले गए, लेकिन परिणाम बस साधारण रहा। फिर उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और शायद दवा की खुराक या बीमारी के कारण वह अंधा भी हो गया—यह भयानक था। बेचारा कुत्ता-जन। और यह मेरे हृदय को भीतर तक व्यथित कर रहा है, आप जानते हैं। हाल के सप्ताहों में घटी घटनाओं में यह भी एक है। इतनी सारी बातें एक साथ आघात कर रही हैं। नकारात्मक शक्तियाँ मुझ तक नहीं पहुँच सकतीं, इसलिए वे मेरे कुत्ता-जनों को निशाना बनाती हैं। लेकिन हम उसे फिर स्वस्थ करने का पूरा प्रयास करेंगे। और आप सभी का धन्यवाद, जिन्होंने कभी भी मेरे कुत्ता-जन के लिए प्रार्थना की है। आपने जितना दिया है, परमेश्वर आपको उससे अधिक प्रदान करें। वास्तव में, एक अन्य कुत्ता-जन को भी थोड़ी समस्या है, लेकिन इतनी गंभीर नहीं। उसे चिकित्सक की आवश्यकता नहीं है, बस कुछ अधिक (स्नेहपूर्ण देखभाल चाहिए।) इसलिए मैंने सहायता दल को इस बारे में बता दिया। और उसकी हालत भी सुधर रही है। यह समस्या अधिक भावनात्मक और मानसिक है; उसे मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता है। मुझे नहीं पता कि अपने कुत्ता-जनों से संबंधित यह अंश आपको सुनाना चाहिए या नहीं। मैं इस पर विचार करूँगी और परमेश्वर से पूछूँगी कि क्या वे इसे प्रसारित करवाना चाहते हैं; अन्यथा मैं इसे हटा दूँगी। Photo Caption: “पेड़ यहाँ रक्षा करने, छाया और सुंदरता देने के लिए हैं”लोमड़ी-व्यक्ति से मास्टर की स्नेहपूर्ण मुलाकातें और मापा तथा बुद्ध राजाओं के साथ उनकी बैठक,11 भागों का भाग 9
2026-11-05
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आज भी परमेश्वर ने मुझसे कहा… क्योंकि मैं बहुत दुखी थी कि पूरी तरह शांति नहीं आई थी। केवल योग्य जन— मनुष्य, पशु-जन, वन, वृक्ष और पर्वत— इसका आनंद लेते हैं। अब तक मैं अक्सर बहुत दुखी रही हूँ। इसलिए आज परमेश्वर ने मुझसे मिलने का समय तय किया। उन्होंने सबसे पहले मुझसे कहा, “विश्व शांति तुम्हारी ज़िम्मेदारी नहीं है।” उन्होंने मुझे सांत्वना देते हुए कहा कि यदि पूरे विश्व को शांति का अनुभव नहीं होता, तो मैं स्वयं को दोष न दूँ, क्योंकि यह उनका अपना चुनाव है। या तो वे नकारात्मक गुट के हैं, उस नकारात्मक शक्ति के जो संसार को हानि पहुँचाने में लगी है; या वे स्वयं उस शक्ति का हिस्सा हैं; या वे हर नकारात्मक बात पर विश्वास करते हैं और परमेश्वर को उन्हें आशीर्वाद देने, उनकी सहायता करने और अपना प्रेम दिखाने का अवसर नहीं देते; या फिर वे सीधे नरक से आए हैं। वे स्वयं दानव हैं। दानव और नकारात्मक शक्ति मिलकर काम करते हैं। वे अलग-अलग सत्ताएँ हैं, लेकिन मिलकर काम करती हैं। दोनों क्रूर और दुष्ट हैं; उनमें न हृदय है, न प्रेम, न किसी के प्रति ज़रा भी संवेदना—इस ग्रह की घास के एक तिनके के प्रति भी नहीं। यदि अपनी सत्ता बनाए रखने या बढ़ाने के लिए उन्हें विनाश करना पड़े, तो वे ऐसा करेंगे। वे मनुष्यों की ऊर्जा, उनका रक्त और उनका आध्यात्मिक सार छीन लेते हैं, जिससे मनुष्य लगातार कमज़ोर होते जाते हैं। और नकारात्मक शक्ति यह सब आहार की तरह ग्रहण करके अधिकाधिक शक्तिशाली होती जाती है। इसीलिए दिव्य लोक के प्राणियों के लिए उन्हें पराजित करना बहुत कठिन है। वे ऐसा कर रहे हैं—कुछ को कुछ तरीकों से, कुछ क्षेत्रों और देशों में हरा रहे हैं—लेकिन सभी को नहीं, पूरी तरह नहीं। इस संसार में होने वाली हर परेशानी, हर युद्ध, हर आपदा और हर दुर्घटना के पीछे मुझे सीधे नकारात्मक शक्ति को ही दोषी ठहराना होगा। इसीलिए मैं तथाकथित युद्धरत लोगों, यहाँ तक कि युद्ध अपराधियों को भी बचाती हूँ, क्योंकि यदि वे बुराई से दूषित हुए हैं, तो इसका कारण यह भी है कि नकारात्मक शक्ति शुरू से ही उन्हें ऐसा बनाना चाहती थी। मुझे उन वास्तविक मनुष्यों पर बहुत दया आती है जिन्होंने अपनी इच्छाएँ पूरी करने के लिए अपनी आत्मा बेच दी— अधिक धन, अधिक प्रसिद्धि या जो कुछ भी वे चाहते हैं। मुझे उन पर भी बहुत दया आती है, क्योंकि वे अत्यंत असुरक्षित, सहज विश्वास करने वाले और अज्ञानी हैं। इसीलिए वे नकारात्मक शक्ति के जाल में फँस जाते हैं; फिर वह उन्हें दास बनाकर हर दिन और भी बुरा करती जाती है, यहाँ तक कि अंततः वे उसी के समान नकारात्मक बन जाते हैं। मैं हमेशा उस अंतिम दिन के आने से पहले उनकी सहायता और रक्षा करने का प्रयास करती हूँ। लेकिन नकारात्मक शक्तियों को सचमुच किसी चीज़ का भय नहीं है। वे अत्यंत दुष्ट और क्रूर हैं। उनकी आत्माविहीन और हृदयहीन प्रकृति का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। मैं इस संसार के घोरतम पापियों को भी बचा सकती हूँ, लेकिन उन्हें भी मुझे ऐसा करने देना होगा। इसके बाद उन्हें स्वयं को बदलना भी होगा, वरना वे पलक झपकते ही फिर नरक में पहुँच जाएँगे। इसीलिए मैं अब भी ट्रान टम को बचा रही हूँ। लेकिन वह पश्चाताप नहीं करता। वह जेल जाएगा और नरक में भी, लेकिन उसे इस पर विश्वास नहीं है। उसे किसी चीज़ में आस्था नहीं है। वह केवल दूसरों की नकल करता है—मेरी बातें, यहाँ तक कि मेरे दैनिक जीवन के कार्य और दूसरी बाहरी चीज़ें भीनकल करता है। और भीतर से वह इतना सड़ चुका है कि दानव उसे पूरी तरह खा चुके हैं। उसके भीतर कुछ भी शेष नहीं है। यदि वह पश्चाताप करे, तो उसे सुधारा जा सकता है और वह धीरे-धीरे फिर सामान्य अवस्था और सामान्य मानव जीवन में लौट सकता है। फिर कई जन्मों के बाद वह किसी अच्छे सद्गुरु से मिल सकता है, क्वान यिन पद्धति का अभ्यास करके सदा के लिए मुक्त हो सकता है। मुझे भी ऐसा करने की अनुमति नहीं है। मैं अपने कर्मों का भार उठाकर उसे नरक से बचा सकती हूँ, लेकिन सदा ऐसा नहीं कर सकती। पिछली बार ही अंतिम अवसर था। अब और नहीं। अब उसके उद्धार या स्वयं को बचाने का कोई अवसर नहीं है; उसके लिए केवल अनंत नरक शेष है। मुझे आशा है कि वह मेरी बात सुनकर अभी स्वयं को बदल लेगा, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए और अब कोई भी उसे नहीं बचा सकता। ऐसा नहीं है कि आप दानवों के लिए काम करेंगे, तो वे आपको पदोन्नति या कोई पुरस्कार देंगे। ओह, ऐसा बिल्कुल नहीं है। नहीं। वे पदोन्नति, दयालुता या अच्छाई के बारे में कुछ नहीं जानते—उनके या नकारात्मक शक्ति के लिए काम करने वालों के प्रति भी नहीं। उनमें आत्मा नहीं है; उनमें प्रेम नहीं है। वे हृदयविहीन, आत्माविहीन और अध्यात्मविहीन हैं। हे परमेश्वर।











